ग्रहण में क्या करे 324

👉🏿ग्रहण के समय पालनीय नियम*
*👉🏿(1) ग्रहण-वेध के पहले जिन पदार्थों में कुश या तुलसी की पत्तियाँ डाल दी जाती हैं, वे पदार्थ दूषित नहीं होते । जबकि पके हुए अन्न का त्याग करके उसे पशुओं को डालकर नया भोजन बनाना चाहिए ।*

*👉🏿(2) सामान्य दिन से चन्द्रग्रहण में किया गया पुण्यकर्म (जप, ध्यान, दान आदि) एक लाख गुना । यदि गंगा-जल पास में हो तो चन्द्रग्रहण में एक करोड़ गुना फलदायी होता है ।*

*👉🏿(3) ग्रहण-काल जप, दीक्षा, मंत्र-साधना (विभिन्न देवों के निमित्त) के लिए उत्तम काल है ।*

*👉🏿(4) ग्रहण के समय गुरुमंत्र, इष्टमंत्र अथवा भगवन्नाम जप अवश्य करें, न करने से मंत्र को मलिनता प्राप्त होती है|*
*👉🏿:1. ग्रहण की अवधि में तेल लगाना, भोजन करना, जल पीना, मल-मूत्र त्‍याग करना,सोना, केश विन्‍यास करना, रति क्रीडा करना, मंजन करना,वस्‍त्रनीचोड़्ना,ताला खोलना, वर्जित किए गये हैं ।*
*2. ग्रहण के समय सोने से रोग पकड़ता है, लघुशंका करने से घर में दरिद्रताआती है,मल त्यागने से पेट में कृमि रोग पकड़ता है, स्त्री प्रसंग करने से सूअर की योनि मिलती है और मालिश या उबटन किया तो व्यक्ति कुष्‍ठ रोगी होता है।*
*👉🏿क्या नही करना चाहिए*
*👉🏿3. देवी भागवत में आता हैः सूर्यग्रहण या चन्द्रग्रहण के समय भोजन करने वाला*

*मनुष्य जितने अन्न के दाने खाता है, उतने वर्षों तक अरुतुन्द नामक नरक में वास करता है फिर वह उदर रोग से पीड़ित मनुष्य होताहैफिरगुल्मरोगी,काना और दंतहीन होता है।*
*👉🏿4. सूर्यग्रहण में ग्रहण से चार प्रहर पूर्वऔरचंद्रग्रहण में तीन प्रहर पूर्व भोजन नहीं करना चाहिए (1 प्रहर = 3 घंटे) । बूढ़े, बालक और रोगी एकप्रहर पूर्व खा सकते हैं ।*
*👉🏿5. ग्रहण के दिन पत्‍ते, तिनके, लकड़ी और फूल नहीं तोड़ना चाहिए*
*👉🏿6. ‘स्कंद पुराण’ के अनुसार ग्रहण के अवसर पर दूसरे का अन्न खाने से बारह वर्षो का एकत्र किया हुआ सब पुण्य नष्ट हो जाता है ।*
*👉🏿7. ग्रहण के समय कोई भी शुभ या नया कार्य शुरू नहीं करना चाहिए।*
*👉🏿मंत्र सिद्धि करे*
*👉🏿चन्द्रग्रहण और सूर्यग्रहण के समय संयम रखकर जप-ध्यान करने से कई गुना फल होता है।*
*👉🏿श्रेष्ठ साधक उस समय उपवासपूर्वक ब्राह्मी घृत का स्पर्श करके ‘ॐ नमो नारायणाय’ मंत्र का आठ हजार जप करने के पश्चात ग्रहणशुद्ध होने पर उस घृत को पी ले।*
*👉🏿ऐसा करने से वह मेधा (धारणाशक्ति), कवित्वशक्ति तथा वाकसिद्धि प्राप्त कर लेता है।*

           🙏जय श्री राम 🙏