अयोध्या के दर्शन एवं यात्रा” 

“अयोध्या के दर्शन एवं यात्रा” 
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अयोध्या नगरी की यात्रा करने की अभिलाषा मुझे कई बर्षो से थी | अयोध्या नगरी जहाँ भगवान का जन्म हुआ, जहा महाकाव्य रामायण की शुरूवात हुई और जहाँ रामायण का समापन्न भी हुआ | अयोध्या नगरी भारत बर्ष में पैदा हुअ बच्चा-बच्चा जानता हैं 

अयोध्या नगरी विभिन्न रंगो में रंगी नगरी हैं, मानो इस पर रंगो का बौछार हुई हो, हर घर हर आश्रम चटर रंगो में रंगा अयोध्या को सजीव एवं चमकदार रूप प्रदान करता हैं |

यहाँ की संकरी गलिया, साईकल, मोटर और मनुष्यो के क्रियाकलापो से गुंजायमान रहती हैं, सही मायनो में यह एक अनोखा एवं अद्भुत शहर हैं | 
    🌷”सरयू नदी”🌷
सरयू नदी का जल एकदम साफ दिखाई पड़ता हैं, नदी में स्नान कर रहा कोई भी व्यक्ति इसकी तलहटी को एकदम साफ निहार सकता हैं, पर्यटक इस नदी को नौका से पार भी करते हैं, मान्यता के अनुसार सरयू नदी को पार कर के ही श्रीराम वन गये थे, नदी के तट पर केवट प्रसंग का स्मरण हो आना अत्यन्त स्वभाविक हैं | 

  

🌷”सरयू जी की आरती “🌷
शाम के समय सरयू नदी पर सरयू आरती होती हैं, मैने इससे पहले ऐसी आरती वाराणसी में गंगा की ऐर बटेश्वर में यमुना की देखी थी, नदीयों के घाचो पर संध्या आरती भी 21वी सदी का नवीन अनुष्ठान प्रतीत होता हैं | हजारो की संख्या में नदी में तैरते हुए मिट्टी के दिये, यह एक अत्यन्त ही मनोहर दृश्य होता हैं|
🌻”गुप्तार घाट”🌻
मेरी सरयू जी कि यात्रा गुप्तार घाट से ही आरम्भ हुई | जो फैजाबाद मे सरयू के दुसरे तट पर स्थित हैं |यह एक अनुठा शांत घाट हैं, जिस पर हल्के पिले रंग का एक भव्य मंदिर हैं | यहा से चाट पकौड़े कि दुकानो के बाजु में रंगबिरंगे नावे भी दिखाई दे रही थी | गुप्तार घाट से जुड़ी दंकथा कहती हैं, कि भगवान राम ने सरयू नदी में जलसमाधी हेतु इसी घाट से प्रवेश किये थे |

सरयू नदी का पाट अत्यंत चौड़ा हैं, उस पर लम्बी नौका सवारी का आनन्द लिया जा सकता हैं | हमे नदी किनारे कई पक्षियों केभी दर्शन हुए | जैसे-जैसे हम अयोध्या के तरफ बढ़ रहे थे, हमे अयोध्या के क्षितिजरेखा दिखाई पड़ने लगी |
 🌼”झुनकी घाट”🌼
गुप्तार घाट से अयोध्या जिस घाट पर पहुचे वह था झुनकी घाट, वराणसी के घाटो से कहीं ज्यादा स्वच्छ एवं भव्य, इस पर ताज़ी सफेदी की हुई थी | मेरे गले मे पड़ी चटक गेंदे की माला मुझे इस स्थान का एक अभित्र अंग महसूस करा रही थी|

यह इतना साफ सुथरा और शांत घाट हैं, कि इस पर सैर करने का एक अलग ही अंदाज हैं |
    🌿”रामघाट”🌿
कहाँ जाता हैं कि इसी घाट पर श्रीराम स्नान किया करते थें|

इसी वजह से यहा आज भी लोग स्नान करते हैं | राम घाट के जल से भगवान को स्नान कराते हैं | उसके बाद अयोध्या का दर्शन करते हैं |
🍃”लक्ष्मण घाट”🍃
झुनकी घाट से थोड़ा आगे जाने पर लक्ष्मण घाट पड़ता हैं| इसी घाट से जुड़ी यह मान्यता हैं, कि राम के भ्राता लक्ष्मण ने इसी घाट पर जलसमाधी ली थी |
🌷”श्रीराम जन्मस्थान”🌷
कहाँ जाता हैं श्रीराम जी जन्म इसी स्थान पर पर हुआ था | श्रीराम जन्मस्थान पर आज भी श्रीरामलला का मुर्ति विरजमान हैं, भक्तगण लम्बी-लम्बी कतारो में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था से गुजरकर श्रीरामलला के दर्शन करते हैं |
🌹”कनक भवन”🌹
लोगो का यह मानना हैंकि महाराज दशरथ और कैकयी ने सिता जी को मुँह देखाई रूप में कनक भवन दिये थे | अयोध्या का कनक भवन बेहद विशाल एवं भव्य मंदिर हैं, राम जानकी कि मुर्ति भी श्रद्धालुओं को मोहित कर देती हैं, तथा श्रीराम जानकी की प्रतिमा हर किसी का संताप हर लेती हैं|
“🌺दशरथ जी का राजमहल”🌺
श्री चक्रवर्ती महाराज दशरथ जी का राज महल बहुत प्राचीन एवं भव्य हैं | इसके परिसर में काफी संख्या में जमा होकर श्रद्धालु भजन-किर्तन गाते हैं |
🌿”दशरथ जी का राजदरबार”🌿

महाराज दशरथ जी का राज्य दरबार बेहद खुबशुरत तथा भव्य हैं, इसका परिसर बहुत बड़ा हैं, इसी दरबार में महाराज दशरथ बैंठ कर न्याय का निर्णय लेते थे |
 🌷”हनुमानगढ़ी”🌷
अयोध्या के बीचोंबीच हनुमानगढ़ी मे रामभक्त हनुमान जी का विशाल प्रसिद मंदिर हैं | ऐसी मान्यता हैं कि अयोध्या में सबसे पहले हनुमानगढ़ी मंदिर में बरंगबली का दर्शन कर के आशिर्वाद लेना चाहिए, फिर अन्य मंदिर जाना चाहिए, ऐसा कहा जाता हैं कि जब भगवान श्रीराम ने जीवन त्याग कर सरयू नदी में समाधी लेने का निश्चय किये तब उन्होने हनुमान को बुलावा भेजे, और उन्हे अपनी अयोध्या की सुरक्षा की जिम्दारी सौंपे

 अयोध्या पर नजर रखने के लिए हनुमान एक पहाड़ पर बैठ गए | ऐसा माना जाता हैं कि उसी पहाड़ पर हनुमानगढ़ी बनाया गया हैं |  मंदिर में हनुमान मुर्ति के स्थान पर एक अनियमित आकार का पत्थर रखा हुआ हैं |

आप जब भी हनुमानगढ़ी के दर्शन जाए उसकी छत पर अवश्य जाए, यहा से सम्पूर्ण अयोध्या नगरी के दर्शन किए जा सकते हैं | 
🍃”दन्तधावन कुण्ड”🍃
अयोध्या नगरी के बीचोबींच हनुमान गढ़ी के इलाके में ही एक बड़ा सा कुंड हैं जो दन्तधावन कुंड के नाम से जाना जाता हैं | इसे ही राम दतौंन कहते हैं, कहा जाता है श्रीराम इसी कुंड के जल से सुबह अपने दांतो की सफाई करते थे |
☘”दिगंबर जैन मंदिर”☘
अयोध्या जैमतावलंबियो के लिए पवित्र तीर्थ हैं मान्यता हैं कि जैंन धर्म के प्रथम तीर्थकर  ऋषभदेव का जन्म यही हुआ था |
🌻”श्रीराम मंदिर कार्यशाला”🌻
अयोध्या में प्रस्तावित श्रीराम मंदिर के निमार्ण के लिए एक कार्शाला बनाई गयी हैं, यहा विशाल पत्थरों के स्तम्भो को बेहद खुबशुरती के साथ तरासा या हैं, जिस पर सुन्दर नक्काशी की गयी हैं, लोग इस स्थान को भी देखने आते हैं |
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